Almora City Tour

Almora City Tour

व्यस्त दिनचर्या और थकान भरी जीवनशैली के आप अभ्यस्त हो गयें हो, पर कभी आपको लगे कि आपने अपने और अपनों के साथ अच्छा वक़्त बिताना है, तो almora आपके लिए एक उपयुक्त स्थान हो सकता है. ये नगर जहाँ एक और ऐतिहासिक महत्व का है, वही सांस्कृतिक, अध्यात्मिक स्थल होने के साथ साथ एक जाना माना पर्यटक स्थल भी है,

आईये रूबरू होते है इस शहर से, बने रहिये इस सफ़र में मेरे साथ, नमस्कार फ्रेंड्स आपका स्वागत है अल्मोड़ा नगर के इस टूर में…

इस जगह से राईट हैण्ड साइड को डोली डाना गोल्जू मंदिर है जो डेढ़ से दो किलोमीटर के soft​ ट्रैकिंग के बाद आता है, ​

फ्रेंड्स ये सड़क जाती है धारानौला को, जो यहाँ से लगभग 5 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है, धारानौला से ही चितई, पिथोरागढ़, आदि के लिए बस, टैक्सी इत्यादी मिलती हैं, इस रूट का विडियो हम पहले ही आपके लिए ला चुके हैं, नीचे डिस्क्रिप्शन में आपको उस विडियो का लिंक मिल जायेगा,

हम तिराहे से बायीं और का मार्ग लेकर पहुचे हैं ब्राइट एंड कार्नर, जिसका नाम अब बदल कर विवेकानंद कार्नर हो गया है,. ये स्थान शाम का वक़्त सूर्यास्त के मनलुभावन नज़ारे के साथ शहरवासियों का वक़्त गुजरने के लिए पसंदीदा जगहों में से एक है. सड़क से उप्पर कैफ़े भी है, जहाँ स्नैक्स और चाय कॉफ़ी आदि मिल जाती है,…

अब हम बढ रहे हैं, विवेकनद कार्नर से आगे… अल्मोड़ा आकाशवाणी केंद्र सड़क से नीचे की ओर , रघुनाथ मॉल और मल्टीप्लेक्स…हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम, vpkas, Kumaon University ka soban singh jeena campus almora,

पिछले लगभग 50 किलोमीटर वन छेत्र और पहाड़ी घुमावदार रास्तो से गुजरकर, जब आप अल्मोड़ा शहर की सीमा में प्रवेश करते हैं, तब आपको अल्मोड़ा शहर में प्रवेश करते ही अलग सा अहसास होता है

अल्मोड़ा, 16 वीं शताब्दी में कुमाऊं साम्राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। एक कथा के अनुसार यह कहा जाता है कि कौशिका देवी ने शुंभ और निशुंभ नामक दानवों को इसी क्षेत्र में मारा था।

इसे एजुकेशन हब कहें, जिला मुख्यालय कहें, ऐतिहासिक नगर कहें, कला व सांस्कृतिक केंद्र कहें या खुबसूरत हिल स्टेशन कहें… कितना भी कह लें, कितना ही छूट जायेगा..

head पोस्ट ऑफिस, रैमजे इंटर कॉलेज, एडम्स गर्ल्स inter कॉलेज, GIC आदि कुछ ब्रिटिश कालीन इमारतों में से एक हैं

चितई, नंदा देवी मंदिर, रघुनाथ मंदिर, हनुमान मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, भैरब मंदिर, पाताल देवी, कसारदेवी, उल्का देवी, बानरी देवी, बेतालेश्वर, स्याही देवी , जागेश्वर, डोलीडाना आस्था के केन्द्र इस शहर की धरोहर हैं

ये चढाई की और जा रही है सड़क – पलटन बाजार में मिलती है और जहाँ से दाई और almora canttonment को रोड जाती है,

ये बिल्डिंग कभी रीगल सिनेमा हुआ करती थी, ये आर्य समाज मंदिर, इससे आगे अल्मोड़ा head पोस्ट ऑफिस, नीचे की और GIC, यहाँ से नीचे GIC के लिए प्रवेश द्वार और almoda डिस्ट्रिक्ट लाइब्रेरी भी है

आज दिन रविवार का है, रविवार को अल्मोड़ा बाजार का साप्ताहिक अवकाश रहता है, आज शायद कोई भर्ती परीक्षा होगी जिसमें ये युवक शामिल हो कर वापस लौट रहे हैं,

​अभी हम गुजर रहे है चौघानपाटा से, बायीं और गाँधी पार्क, दहिनी हाथ को पालिका बाजार, लोक निर्माण विभाग (PWD) का कार्यालय, अब हम पहुचे वाले है KMOU और रोडवेज बस अड्डे, उप्पर के और SBI के मुख्य शाखा, और उसे उप्पर अल्मोया कचहरी स्ठित है

राईट हैण्ड को almora muncipility/ नगरपालिका का ऑफिस, और ये रही अल्मोड़ा की प्रसिद्द खिम सिंग मोहन सिंह, इसके अलावा अल्मोड़ा के जोगा लाल शाह की बाल मिठाई भी प्रसिद्द है, यहाँ से लेफ्ट हैण्ड को अल्मोड़ा का प्रसिद्द सीडी बाजार जो उप्पर जाकर अल्मोड़ा के मुख्य बाजार – यानी पटाल बाजार पर मिल जाती हैं

​​ये इंडियन आयल का पेट्रोल पंप, इससे आगे एक और पेट्रोल पंप है, भारत पेट्रोलिम का, और ये रोड है लिंक रोड जो नीचे जाकर लोअर माल रोड पर मिल जाती है, यहाँ से उप्पर/ राईट हैण्ड साइड को रैमजे inter college है, जिसका एंट्रेंस उप्पर चौक बाजार से है, और बायीं ओर लिंक रोड से लगता हुआ GGIC, का नामकरण राजा आनंद सिंह जी जो की कुमाऊं अंतिम चंदवंशीय राजा हुए और जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे के नाम पर रखा गया है. जिसे राजा आनंद सिंह बालिका इंटर कॉलेज भी कहते है,।

अल्मोड़ा के इतिहास और भूगोल के बारे में, हम इसी विडियो के अगले हिस्से में बात करेंगे

फ़िलहाल आगे बड कर, और होटल शिखर, और ये राईट हैण्ड को जा रही सड़क है LR Shah रोड, ये वन वे रोड है, जिसके अनुसार सिर्फ उप्पर से ही चौपहिया वाहन नीचे की ओर ही आ सकते है, यातायात के निर्बाधित रूप से संचालन के लिए नीचे से उप्पर की दिशा चौपहिया वाहन ले जाने की अनुमति नहीं है, और उप्पर से नीचे आने पर भी आप होटल शिखर से ggic की दिशा में ना जाकर या तो आपको अपनी दाहिनी हाथ की दिशा में घूमकर जाखन देवी की ओर जाना होगा या फिर अगर आपका बाजार में कार्य है यही स्थित multistorey पार्किंग में वहां पार्क करना होगा. ये रहा अल्मोड़ा का multistorey पार्किंग, जिसने अल्मोड़े का सुचारू यातायात का बहुत बड़ा जिम्मेदारी अपने कंधो पर उठाई है,

LR शाह रोड में ही ४०-५० मीटर आगे मिलन चौक है जहाँ पटाल बाजार का एक सिरा मिलता है, ये एरिया है चम्पनौला का, अभी हम गुजर रहे है जाखन देवी से, नीचे की और अल्मोड़े के कई भैरव मंदिरों में से एक भैरव मंदिर है,

ये रहा diet (राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण सस्थान एक एंट्रेंस)

ये उप्पर के ओर जा रही रोड आगे पातालदेवी और आगे जा फिर दो हिस्सों में विभक्त हो जाती है जो सीधा बागेश्वर वाया ताकुला, बिनसर होते हुए और दाहिनी और जागेश्वर, पिथोरागढ़ वाया चितई होते हुए जाती है, हम जहाँ से आगे बड रहे है ये रोड कौसानी/ रानीखेत और उससे आगे गढ़वाल मंडल को कनेक्ट करती है, रानीखेत के लिए यहाँ से लगभग 12 किलोमीटर बाद कोसी आता है, कोसी पार करने के बाद लेफ्ट हैण्ड साइड को रानीखेत और राईट हैण्ड साइड को कौसानी को रास्ता है,

हालाकिं वर्तमान में इंसानों की बसासत और अनियोजित निर्माण ने इनका वजूद समाप्त कर दिया, ​पर एक वक़्त पहले तक ​अल्मोड़ा में प्राकर्तिक जलश्रोत​ काफी नौले और धारे रहे थे, जैसे धारानौला, सुनारी नौला, नैनी धरा, चंपा नौला, थपलिया, कर्नाटक खोला, थाना बाजार, खगमरा, पोखरखाली, बद्रेश्वर, जाखनदेवी, NTD आदि में आज भी नौले और धारे के अवेशष देखे जा सकते हैं,

अल्मोड़ा कुमाऊ का एक प्रमुख शहर है जहाँ से कुमाओं और गडवाल के प्रमुख जगहों के लिए मार्ग जाता है जैसे नैनीताल, हल्द्वानी, पिथोरागढ़, बागेश्वर, द्वाराहाट, रानीखेत, कौसानी, जागेश्वर, कर्णप्रयाग, चमोली, आदि को, स्क्रीन में आपको इन स्थानों की अल्मोड़ा से दुरी का चार्ट दिख रहा है

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इतिहासकारों की मान्यता है कि सन् १५६३ ई. में चंदवंश के राजा बालो कल्याणचंद ने आलमनगर के नाम से इस नगर को बसाया था। चंदवंश की पहले राजधानी चम्पावत थी। कल्याणचंद ने इस स्थान के महत्व को भली-भाँति समझा। तभी उन्होंने चम्पावत से बदलकर इस आलमनगर (अल्मोड़ा) को अपनी राजधानी बनाया।

सन् १५६३ से लेकर १७९० ई. तक अल्मोड़ा का धार्मिक भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व कई दिशाओं में अग्रणीय रहा। इसी बीच कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं राजनैतिक घटनाएँ भी घटीं। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टियों से भी अल्मोड़ा समस्त कुमाऊँ अंचल का प्रतिनिधित्व करता रहा।

सन् १७९० ई. से गोरखाओं का आक्रमण कुमाऊँ अंचल में होने लगा था। गोरखाओं ने कुमाऊँ तथा गढ़वाल पर आक्रमण ही नहीं किया बल्कि अपना राज्य भी स्थापित किया। सन् १८१६ ई. में अंग्रेजो की मदद से गोरखा पराजित हुए और इस क्षेत्र में अंग्रेजों का राज्य स्थापित हो गया।

स्वतंत्रता की लड़ाई में भी अल्मोड़ा के विशेष योगदान रहा है। शिक्षा, कला एवं संस्कृति के उत्थान में अल्मोड़ा का विशेष हाथ रहा है।

कुमाऊँनी संस्कृति की असली छाप अल्मोड़ा में ही मिलती है – अत: कुमाऊँ के सभी नगरों में अल्मोड़ा ही सभी दृष्टियों से बड़ा है।

जनपद की मुख्य नदियों में रामगंगा, कोसी तथा सुयाल नदियां हैं । जनपद के प्रमुख कृषि उत्पाद चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, चाय, सेब, आड़ू, खुबानी, पूलम हैं। तथा मयूर, ग्रे बटेर, काला तीतर, चिड़िया, चकोर, मोनाल तीतर, बाघ, चीतल, तेंदुआ, लोमड़ी, गोराल, हिम तेंदुआ, काले भालू जनपद में पायी जाने वाली जीव जन्तुओं की मुख्य प्रजातियां हैं। जनपद का मौसम सर्दियों में ठण्डा तथा गर्मियों में सुहावना रहता है। ऊंचाई वाले स्थानों में सर्दियों में जमकर हिमपात होता है। जनपद का औसत तापमान ३१.०३ डिग्रीसे० गर्मियों में तथा १३.६० डिग्रीसे० सर्दियों मे रहता है। जुलाई से सितंबर तक जनपद में भारी वर्षा होती है । जनपद में औसतन ९४५ मिमी० वर्षा होती है। अल्मोड़ा जिले में आपका घुमने आने का प्रोग्राम हो तो पर्यटन और होटल सम्बन्धी अन्य जानकारी के लिए आप वेबसाइट almoraonline.com विजिट कर सकते हैं,

आवागमन के मुख्य साधनों में कुमाऊं मोटर्स ओनर्स यूनियन लिमिटेड (केएमओयू लि.), व उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसें हैं जो अल्मोड़ा जनपद को देहरादून, उत्तरप्रदेश, दिल्ली व उत्तराखण्ड के अन्य जनपदों से जोड़ती हैं। साथ ही जनपद के सभी मुख्य नगरों में टैक्सी यूनियन भी हैं जो कि वर्ष भर निरंतर पर्यटकों का आवागमन आसान करती हैं। जनपद का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन लगभग ९० किमी० कि दूरी पर काठगोदाम में स्थित है । जनपद का निकटतम एअरपोर्ट पंतनगर में स्थित है जो कि अल्मोड़ा से लगभग १२७ किमी० की दूरी पर स्थित है

अब ये बायीं और दींन दयाल उपाध्याय पार्क…

अल्मोड़ा शहर के इस राउंड trip में, सफ़र की शुरवात हुई अल्मोड़ा शहर के एक छोर कर्बला तिराहे से जो मॉल रोड बस अड्डे से आगे जाखन देवी, लक्ष्मेश्वर, पांडेखोला तिराहे और वही से वापसी में लोअर मॉल रोड में कर्नाटक खोला, सर्वोदय नगर, खत्याड़ी, आदि से होते हुए फिर से कर्बला तिराहे पर समापन होगा.

जिसमे हमने तय की लगभग 14 किलोमीटर की दुरी, कर्बला से पाण्डेखोला की माल रोड होते हुए दुरी लगभग .6.6 किलोमीटर, और पाण्डेखोला से कर्बला के दुरी via लोअर मॉल रोड से लगभग 9 किलोमीटर

खैर अब हम पहुचे pandeykhola bypaas में यहाँ से लेफ्ट टर्न ले हम घुमे लोअर मॉल रोड को, ये रहा अल्मोड़े का तीसरा पेट्रोल पंप भारत पेट्रोलियम का, और उसके ठीक एक और पेट्रोल पंप – इंडियन आयल का, इसके अलावा एक और पेट्रोल पंप धारानौला में स्थित है

और pandeykhola अल्मोडा का काफी घनी आबादी वाला एरिया हैं,

इससे आगे बढ़ हम अभी गुजर रहें है कर्नाटकखोला से, यहाँ से उप्पर के और मॉडल फील्ड है, कर्नाटक खोला भी अल्मोड़े के बड़ी रिहायिस वाले क्षेत्रों में से एक है, अभी हम पहुचे सर्वोदय नगर से, इसे खोल्टा भी कहते है, लोअर मॉल रोड में सबसे बड़ी बाजार यही है, यहाँ पर भी हर तरह की दुकाने जैसे हार्डवेयर, genral स्टोर, रेस्टोरेंट, मेडिकल स्टोर, बार्बर शॉप इत्यादि की दुकाने मिल जायेंगी,

यहाँ से नीचे दाहिनी हाथ की और कुमाओं यूनिवर्सिटी का बॉयज हॉस्टल, ये लेफ्ट हैण्ड साइड को लिंक रोड का दूसरा सिरा जो उप्पर जा कर GGIC/ Taxi Stand mei mil jaata hai.

अब हम पहचे सावरकर मार्किट, यही से उप्पर की और ssj campus को सड़क जा रही है, जो वही से और उप्पर जा कर माल रोड TRH/TRC के पास मिल जाती है. ये रहा खात्याडी का एरिया, सनसेट का समय होने की वजह से हमारे कैमरा में सूरज के सीढ़ी रौशनी पड़ रही है, जिस से कही कही पर सामने का क्लियर नहीं visible नहीं हो रहा, इस हेतु खेद है,

ये रहा बसे हॉस्पिटल का एंट्रेंस, यहाँ से आगे फिर रिहायशी इलाका समाप्त हो जाता है और वन क्षेत्र शुरू हो जाता है

आगे कर्बला bypaas जहाँ से सफ़र की शुरुआत की थी – वही हम पहुच जायेंगे, टोटल डिस्टेंस जो हमने अभी तक कवर किया – वो तक़रीबन 15 किलोमीटर है

फिर मुलाकात होगी एक और नए सफ़र में,, इसलिए अपडेट रहने के लिए popcorn trip चैनल subscribe करने के साथ साथ bell आइकॉन में क्लिक करना न भूले, विडियो पसंद आया हो तो like करें, शेयर करें, कमेंट करें. धन्यवाद