Author: Sushil Tewari

वाह उस्ताद… सईद साब…

यूँ तो दोस्तों, वक़्ती तौर पर अल्मोड़ा नगर को एक कौमी एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है जहाँ से एक से बढ़कर एक प्रतिभाएँ विकसित हुईं और एक से बढ़कर एक कलाकार पैदा हुए। यही नहीं, दशहरा और मोहर्रम में परस्पर भागीदारी ने इन मौकों को मुक़द्दस और आलीशान त्यौहारों के रूप […]

मिर्ज़ा साब कैफ़े वाले…

यूँ तो दोस्तों इस फ़ानी दुनिया में हर इंसान के दिलो दिमाग में कई तरह के विचार आना लाज़मी है क्योंकि वैज्ञानिक रूप से वह जानवर की श्रेणी से ऊपर है,जहां किसी चौपाऐ में दिल, दिमाग और पेट ज़मीन के समानांतर मिलेंगें वहीं इंसान में सबसे ऊपर दिमाग, फिर दिल और फिर पेट ज़मीन के […]

किसी के प्यार में वर्ना (वर्मा) टैनी होना…

यूँ तो दोस्तों अपने दैनिक जीवन में हम अक्सर देखते सुनते हैं किफलाने के प्यार में ढिमकाने नें ऐसी प्रतिक्रिया दी, दोनों नें बाद में शादी कर ली, अलग हो गए, प्रेमी को बुरी तरह पिटवा दिया या प्रेमिका के चेहरे को खराब कर दिया, खुद अपनी जानें ले ली या आॅनर किलिंग के शिकार […]

लाल बहादुर दाई उर्फ़ हनुमान…

यूँ तो दोस्तों हमारे आसपास होने वाले घटनाक्रमों के बीच कई बार ऐसा भी होता है कि जब कोई अंजान शख़्सियत किसी ख़ास शख़्सियत से इस क़दर मेल खाती है कि लोग असल शख़्सियत का नाम इस अंजान शख़्सियत को दे बैठते हैं।धीरे-2 वह अंजान शख़्सियत असली शख़्सियत का ऐसा नाम रोशन करती है कि […]

इकबाल नाई उर्फ़ बबाल भाई…

यूँ तो दोस्तों हमारे समाज में लम्बी- 2 फेंकने वालों बड़ा महत्तवपूर्ण स्थान रहा है और रहेगा.. हालाकि उन्होंने फेंकने के अलावा समाज में बदलाव के प्रयास न किये, न ही ऐसे काम जिनके कारण उन्हें याद रखा जा सके। वो सिर्फ अपनी फेंकने की अदा से याद किए जातें है और मनोरंजन के पात्र […]

अल्मोड़ा में साह जी का त्रिशूल होटल और नंदू मैनेजर

नंदू मैनेजर… यूँ तो दोस्तों सच है कि इस दुनियाँ में बिना मेहनत मशक्कत के कुछ नहीं मिलता बावजूद इसके अपने समाज के अधिकांश मज़दूर या शारीरिक श्रम करने वाले लोग सारी उमर भर फाँके में ही रह गये जबकि दलाल – ठेकेदार और ठेकेदार – नेता बन सारे राज्य के संसाधनों को पलीता लगाकर […]

अल्मोड़ा आकर एक परिवार की चमकने और डूबने की कहानी।

बादल… बेला… यों तो दोस्तों इस दुनिया में होने वाला हर लम्हा, हर चीज़ परिवर्तनशील है जो कि प्रकृति का नियम है। इस पर समय रुपी दौर की क्या बात करे.. अलग-2 दौर ने वक्त – 2 में आदमी को कैसे छला है.. यह सिर्फ वह आदमी या वक्त ही बता सकता है.. हम आप […]

अल्मोड़ा ज़िला लाइब्रेरी का नया स्वरूप पुस्तक प्रेमियों का दिल जीत लेगा!

शुक्रिया डी एम साहिबा… दोस्तों तकरीबन छह माह पहले जिलाधिकारी महोदया अल्मोड़ा द्वारा जो एक सराहनीय पहल राजकीय जिला पुस्तकालय को लेकर की गई थी, जो दशकों पुराने पुस्तकालय के जीर्णोद्धार की थी, अब वह पूरी हो चुकी। विगत रविवार को आयोजित तथाकथित लोकार्पण में जनप्रतिनिधियों की होड़ रही पर सालों की पड़ी इस जरूरत […]

विशालकाय बकायन के पेड़ की डालें काटता हुआ शेरदा

हमारा शेरदा उर्फ़ शेरुवा…. यूँ तो दोस्तों अक्सर इतिहास,साहित्य अथवा सिनेमा आदि की दुनिया में कई बार हम ऐसे चरित्रों से रुबरू होते हैं जिनका जीवन एक महामानव सरीखा यानि ‘लार्जर देन लाईफ़‘ लगता है, पर यदि हम जीवन में सिर्फ अपने आप में ही ना खोए हो,अपने आसपास घटित होने वाली घटनाओं व परिस्थितियों […]

अल्मोड़ा का पेले (हरिया), कभी फूटबाल का सितारा, अब कहाँ!

आज बात केवल एक खेल प्रतिभा की। हरिया पेले … जो अल्मोड़ा में 90 के दशक का फूटबाल का जादूगर था। बरस 1990 के शुरुआत का वह दौर जब दुनिया के एक समाजवादी देश के ढहने और ‘आर्थिक आजादी’ जैसे सपने के शोर में हमारा देश भी उस पीढ़ी को अपने हित के सब्ज़बाग दिखाने […]

अल्मोड़ा जिला पुस्तकालय की यादें

दोस्तों इस बीच एक दिन फिर जिला पुस्तकालय, अल्मोड़ा जाना हुआ किताब वापसी के सिलसिले में… पुस्तकालय बंद देखकर पता किया कि क्यों बंद है? तो जानकर एक सुखद एहसास हुआ कि पुस्तकालय के जीर्णोदार का काम चल रहा है। पुस्तकों बावत पूछने पर पता चला कि यहाँ की सारी पुस्तकें, पांडुलिपिया व अन्य दस्तावेज […]