अल्मोड़ा से रानीखेत तक का सफर

अल्मोड़ा से रानीखेत तक का सफर

प्राकृतिक सौंदर्य के आंचल में बसे उत्तराखंड की बात ही निराली है,यहां खूबसूरत वादियों के साथ-साथ विविध संस्कृति का संगम भी मिलता है, फिर आज क्यों ना अल्मोड़ा से रानीखेत का सफर किया जाएं।

अल्मोड़ा शहर जिसके बारे में जितना कहु कम है, हमारी कुमाउँनी संस्कृति की असली छाप अल्मोड़ा से ही देखि जा सकती है, इसे सांस्कृतिक नगरी से भी जाना जाता है।

श्यालीधार पर लगा वो बोर्ड जब भी अल्मोड़ा जाता हूँ उस पर लिखा हुआ पढने में बुहत ही आनन्द आता है, “संस्कृतिक नगरी में आप का स्वागत है” उसके बाद आप निचे को जाते है, चीड़ के ऊंचे-ऊंचे पेड़ संकरे रास्ते और पक्षियों का कलरव मिलेगा और यहां शहर के कोलाहल से दूर ग्रामीण परिवेश का अद्भुत सौंदर्य देखने को मिलेगा।

यहां से दिखने वाले पहाड़ों पर सुबह दोपहर और शाम का अलग-अलग रंग साफ दिखता है. इस इलाके में छोटे-छोटे खेत आस पास गांव पत्थर के बने मकान सच कहु तो जब भी में अल्मोड़ा से अपने घर को जाता हूँ शायद ही मेरी पलके झपकती हो शहर से जब भी गांव जाओ तो दिल करता है बस इन्हीं पहाड़ो को देखू और इन में खो जाऊ बस सामने पहाड़ी पर आप को सूर्य मंदिर के दर्शन भी होते है।




कोसी नदी इस नदी से बुहत यादें जुडी है,गर्मी के दिनों में जब नानी के यहाँ आना होता था तो यहाँ जरूर आते थे बिना बताये कोसी नदी के किनारे सकूँ से बैठना एक मजेदार अनुभव हैं आप यहाँ अपने बीते पलों को याद करंगे तो बुहत ही अच्छा एहसास होगा।

कटारमल गांव सूर्य मंदिर से जाना जाता है एक और ख़ासियत यहाँ की कोसी से १ किमी दुरी पर आप को धारा मिलेगा जो हर मौसम में एक सम्मान पानी देता है और बुहत शीतल जल जो भी पर्यटक अल्मोड़ा से रानीखेत जाते है, यहाँ पर गाड़ी रोक कर ही जाते है।

आगे रानीखेत को निकलते हुए आप को छोटी-छोटी मार्किट मिलेंगी आगे जा कर मजखाली से युँ लगता है, हिमालय के आस-पास ही है, वैसे तो रानीखेत देखने लायक़ जगह है ।

अल्मोड़ा से आने वाले रोड पर चीड़ के घने जंगल के बीच यहां दुनिया का सब से मशहूर गोल्फ मैदान भी है,यहां कई फिल्मों की शूटिंग भी हुई है, कोमल हरी घास वाला यह मैदान 9 छेदों वाला है, ऐसा मैदान बहुत कम देखने को मिलता है,कुछ दूर स्थित चिलियानौला नामक जगह है, घूमने और ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह एक अच्छी जगह है, यहां फूलों के सुंदर बाग हैं जिन की सुंदरता देखते ही बनती है।

उत्तरांचल दीप में प्रकाशित मेरी यह रचना मुझे बेहद पसंद है।

श्याम जोशी अल्मोड़ा (चंडीगढ़ )

Shyam Joshi
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