नोट: – निम्न लेख- मई 2020 में प्रकाशित हैं, दोनों बहने वर्तमान में (अक्टूबर 2025) एडीएम (Additional District Magistrate) के रूप में कार्यरत है। बहिन युक्ता मिश्र – अल्मोड़ा, बहिन मुक्ता मिश्र – उत्तरकाशी में। ———- आप छह – सात वर्ष पूर्व – अल्मोड़ा के पोस्ट ऑफिस में किसी भी कारण गए होंगे, तो आपने […]
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अल्मोड़ा दो दशक पहले!
तब लोग मिलन चौक में लाला बाजार से थाना बाजार तक तो लगभग रोज ही घूम आते। अब भी शायद जाते हों। यह हैं अल्मोड़ा का मशहूर मिलन चौक, नाम के अनुरूप – यहाँ रोड के किनारे खड़े हो, मित्रो, परिचितों के मध्य अक्सर अनौपचारिक मीटिंग्स हुआ करती। उस दिनों जब हम अपनी […]
इंतज़ार किसी और का
कभी – कभी रवि पास के जंगल में पैदल सैर के लिए निकल जाता था।दूर गाँव की ओर जाने वाले जंगल के रास्ते में ताजी हवा मिलती, और प्रकृति के साथ समय बिताने का मौका भी। पेड़ों पर उछल-कूद करते या करतब दिखाते पक्षी भी दिख जाते थे। आज भी रवि निकला था। मुख्य सड़क […]
अल्मोड़ा नगर निगम चुनाव: भाजपा के अजय वर्मा बने पहले मेयर
अल्मोड़ा: नगर निगम के पहले मेयर चुनाव में भाजपा के अजय वर्मा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस के गढ़ को तोड़ा। उन्होंने 8,788 मतों के साथ कांग्रेस के उम्मीदवार भैरव गोस्वामी को 2,479 मतों के अंतर से हराया। चुनाव की मुख्य बातें: भाजपा की ऐतिहासिक जीत: यह नगर निगम के इतिहास में पहला […]
समय के साथ कैसे बदलते हैं हमारे सपने और मूल्य
अक्सर यह सुना जाता है – ‘अब तो जमाना बहुत बदल गया है, नई जनरेशन बहुत खराब हो गई है।’ हालांकि, ऐसी बातें हर दौर में पुरानी पीढ़ी द्वारा नई पीढ़ी के बारे में कही जाती रही हैं। तो फिर, कौन गलत है? पुरानी पीढ़ी के लिए, नई पीढ़ी सभ्यता के अंत जैसी लगती है, […]
व्लॉगर की भूल, एक गाँव की सुरक्षा पर खतरा
(1) उत्तराखंड के सुंदर, हरे-भरे पहाड़ों का दृश्य। गाँव की शांत वादियों में एक छोटी सी पगडंडी है, जिसके किनारे फलों के पेड़ हैं और रास्तों में चलते हुए झरने का धीमा-धीमा संगीत सुनाई देता है। पृष्ठभूमि में गाँव के छोटे-छोटे मिट्टी और पत्थर के बने घर दिखाई देते हैं। यही पर। एक वृद्ध महिला […]
ग्रामवासियों के प्रयासों से अल्मोड़ा में हुआ नौले का पुनर्जीवन
कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले के अंतर्गत आने वाले साल्ट ब्लॉक के ग्रामीणों ने एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने 25 साल पहले सूख चुके नाले को पुनर्जीवित कर दिखाया है, जो अब 300 से अधिक ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध करा रहा है। अल्मोड़ा जिले के साल्ट ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कालीगाड़ गांव के […]
सरकारी सुख से टपकते नल तक: मकान मालिक बनने का सफ़र
जनाब, जब भी जीवन के सफर में मुड़कर देखा तो सरकारी मकानों में रहने का सुख हमेशा याद आता है। कठघरिया में बसने के बाद जब भी प्लंबर, कारपेंटर की खोज में श्रीमती जी द्वारा दोड़ाया जाता हूँ या उनका इंतजार कर रहा होता हूँ तो वो सुनहरे दिन याद आते हैं जब हम भी […]
धरौदा – दशकों पहले के अल्मोड़ा के घर की यादें!
चंपा नौला का तीन मंजिला मकान मेरी दिल्ली वाली बुआ के ससुराल वालों का था, और हम लोग उस मकान के पांच कमरों में साठ रुपये महीने के किराएदार थे। बीच वाली मंजिल में देबी बुआ रहती थीं, सबसे ऊपर सागुडी जी मास्टर साहब और बगल में ख्याली राम पांडे जी का परिवार रहता था। […]
वाह उस्ताद… सईद साब…
यूँ तो दोस्तों, वक़्ती तौर पर अल्मोड़ा नगर को एक कौमी एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है जहाँ से एक से बढ़कर एक प्रतिभाएँ विकसित हुईं और एक से बढ़कर एक कलाकार पैदा हुए। यही नहीं, दशहरा और मोहर्रम में परस्पर भागीदारी ने इन मौकों को मुक़द्दस और आलीशान त्यौहारों के रूप […]
अखबार से नेटफ्लिक्स तक, एक आम आदमी की जिंदगी
एक तो गर्मी का मौसम और जीवन का चौथा प्रहर। जनाब काटे नहीं कटे ये रतियाँ, बीते नहीं बीते ये दिन। उम्र का तकाजा रात देर से आँख लगना और सुबह सवेरे ही खुल जाना, यानि वैसे ही ये चौबीस घंटे कैसे कटे कैसे कटे कर कटते हैं उस पर देर से सोना जल्दी उठना […]
अल्मोड़ा के कुछ बेहतरीन रेस्टोरेंट/ कैफ़े (फ़ेसबुक फीड पर आधारित)
क्या आप भी अल्मोड़ा के लजीज खाने के दीवाने हैं? पिछले दिनों, हमने अपने फेसबुक पेज पर अल्मोड़ा ज़िले के बेहतरीन रेस्टोरेंट के बारे में पूछा था। और हमें ढेरों शानदार जवाब मिले! आइए, इन जवाबों में झांकते हैं, और जानते हैं कि अल्मोड़ा के लोगों ने किन-किन स्वादिष्ट फ़ूड पॉइंट्स का जिक्र किया! अगर […]
बिंसर – प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग
यह दुनिया जितनी मनुष्यों की है, उतनी ही वन्य जीवों, पक्षियों, वनस्पतियों आदि की भी है। लेकिन मानव अपनी आधुनिक जीवन शैली के कारण प्रकृति और ईको सिस्टम को संरक्षित करने की सामान्यतः परवाह नहीं करते या ध्यान नहीं दे पाते। तब मानव द्वारा ही इन्हें संरक्षित करने के लिए रिज़र्व फारेस्ट तैयार करने की […]
कसार देवी: जहां हिमालय की ऊंचाइयां छूती है आध्यात्मिक ऊर्जा!
अल्मोड़ा से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित कसार देवी, यहाँ से दिखने वाले खूबसूरत नज़ारों के साथ-साथ ध्यान और आध्यात्म के पवित्र तीर्थस्थल – कसार देवी मंदिर के लिए जाना जाता है। कसारदेवी से हिमालय की विस्तृत श्रृंखलाएँ दिखाई देती हैं। सर्दियों का समय इन पर्वत श्रृंखलाओं को देखने के लिए सबसे अच्छा होता है। […]
जिम में गिरधारी… बना गज्जू भाई!
अल्मोड़ा का शायद वह पहला जिम था, “फ़्रेंड्स बॉडी बिल्डिंग क्लब” (FBBC), जहाँ तेज म्यूजिक और डम्बल टकराने की आवाज़ें गूंजती थीं, और दीवारों पर बॉडी बिल्डर्स के दमदार मांसपेशियों वाले पोस्टर लगे हुए थे। शहर में खुला हुआ यह नया जिम, उस समय के युवाओं के लिए स्टेटस सिंबल बन गया था। इसी समय […]
कॉलेज के प्रेम की दौड़…!
बात कुछ वर्ष पुरानी है, तब अल्मोड़ा सोबन सिंह जीना कॉलेज कैंपस तब यूनिवर्सिटी नहीं बना था, इस सह–शिक्षा (Co-Education) कॉलेज में शिक्षा की मात्रा कम और सह पर ज़्यादा फोकस हुआ करता था। कुछ लोग कैंपस में इसलिए आते कि अपने प्रेमी युगल से मिल सके, कुछ इस आरज़ू में आते कि – कभी […]
बिनसर की वो रात!
जनाब, न तो आजकल के समान सुविधाएं थीं और न ही उस समय की सुविधाओं का उपभोग करने की सामर्थ्य। पॉकेट मनी बस नाम मात्र को मिलती थी, वरना जेब खर्च तो बाजार से लाए जाने वाले सामान में हेराफेरी से ही चलता था। पुस्तकों ने भी जेब खर्च की कमी को पूरा करने और […]
मिर्ज़ा साब कैफ़े वाले…
यूँ तो दोस्तों इस फ़ानी दुनिया में हर इंसान के दिलो दिमाग में कई तरह के विचार आना लाज़मी है क्योंकि वैज्ञानिक रूप से वह जानवर की श्रेणी से ऊपर है,जहां किसी चौपाऐ में दिल, दिमाग और पेट ज़मीन के समानांतर मिलेंगें वहीं इंसान में सबसे ऊपर दिमाग, फिर दिल और फिर पेट ज़मीन के […]
किसी के प्यार में वर्ना (वर्मा) टैनी होना…
यूँ तो दोस्तों अपने दैनिक जीवन में हम अक्सर देखते सुनते हैं किफलाने के प्यार में ढिमकाने नें ऐसी प्रतिक्रिया दी, दोनों नें बाद में शादी कर ली, अलग हो गए, प्रेमी को बुरी तरह पिटवा दिया या प्रेमिका के चेहरे को खराब कर दिया, खुद अपनी जानें ले ली या आॅनर किलिंग के शिकार […]
लाल बहादुर दाई उर्फ़ हनुमान…
यूँ तो दोस्तों हमारे आसपास होने वाले घटनाक्रमों के बीच कई बार ऐसा भी होता है कि जब कोई अंजान शख़्सियत किसी ख़ास शख़्सियत से इस क़दर मेल खाती है कि लोग असल शख़्सियत का नाम इस अंजान शख़्सियत को दे बैठते हैं।धीरे-2 वह अंजान शख़्सियत असली शख़्सियत का ऐसा नाम रोशन करती है कि […]
इकबाल नाई उर्फ़ बबाल भाई…
यूँ तो दोस्तों हमारे समाज में लम्बी- 2 फेंकने वालों बड़ा महत्तवपूर्ण स्थान रहा है और रहेगा.. हालाकि उन्होंने फेंकने के अलावा समाज में बदलाव के प्रयास न किये, न ही ऐसे काम जिनके कारण उन्हें याद रखा जा सके। वो सिर्फ अपनी फेंकने की अदा से याद किए जातें है और मनोरंजन के पात्र […]
अल्मोड़ा में साह जी का त्रिशूल होटल और नंदू मैनेजर
नंदू मैनेजर… यूँ तो दोस्तों सच है कि इस दुनियाँ में बिना मेहनत मशक्कत के कुछ नहीं मिलता बावजूद इसके अपने समाज के अधिकांश मज़दूर या शारीरिक श्रम करने वाले लोग सारी उमर भर फाँके में ही रह गये जबकि दलाल – ठेकेदार और ठेकेदार – नेता बन सारे राज्य के संसाधनों को पलीता लगाकर […]
