अल्मोड़ा का इतिहास

अल्मोड़ा जिला भारतवर्ष में उत्तराखंड राज्य के कुमाऊँ मंडल में एक जनपद है। जिसका मुख्यालय अल्मोड़ा में है। यह स्थान समुद्र तल से 1,638 मीटर की ऊंचाई में है।

अल्मोड़ा के पूर्व में पिथौरागढ़ जनपद, पश्चिम में गढ़वाल क्षेत्र, उत्तर में बागेश्वर जनपद और दक्षिण में नैनीताल जनपद है।

अल्मोड़ा हिल स्टेशन एक पर्वत के घोड़े की नाल के आकार के पहाड़ी पर स्थित है। अल्मोड़ा, यहाँ हिमालय के नयनाभिराम दर्श्यों, सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प और अपने विशिष्ट खान पान से पर्यटकों को आकर्षित करता है।

कुमाऊँ क्षेत्र के लिए अल्मोड़ा  – एक महत्पूर्ण व्यापारिक केंद्र है। जिसकी स्थापना चंद वंश के राजाओं द्वारा की गयी। ब्रिटिश शासन द्वारा इसे ब्रिटिश काल में विकसित किया गया।

अल्मोड़ा का प्राचीन नगर, अपनी स्थापना से पूर्व , कत्यूरी राजा बैचल देव के शासन का हिस्सा था। इस भूमि का एक बड़ा भाग उन्होंने – एक गुजराती ब्राह्मण श्री चंद तिवारी को दान कर दिया।

बाद में जब बारामंडल में चंद साम्राज्य की स्थापना हुई, तो अल्मोड़ा शहर की स्थापना 1568 में कल्याण चंद के शासन का केंद्र था। चंद राजाओं के समय में इसे राजपुर कहा जाता था। ‘राजपुर’ नाम का उल्लेख कई प्राचीन तांबे की प्लेटों पर भी किया गया है।

अल्मोड़ा शहर कुमायूं का प्रशासनिक मुख्यालय था; 1815 में अंग्रेजों और गोरखा युद्ध में, गोरखा सेना की हार के पश्चात  1816 में सुगौली की संधि का गठन किया गया था। कुमाऊं जिले में तब पूरा कुमाऊं मंडल शामिल था, जो काशीपुर में अपने मुख्यालय के साथ तराई जिले को छोड़कर था। 

1837 में, पौड़ी में अपने मुख्यालय के साथ गढ़वाल को एक अलग जिला बनाया गया था। 1891 में नैनीताल जिले को कुमाऊं जिले से अलग किया गया, और कुमाऊं जिले का नाम इसके मुख्यालय बनने के बाद अल्मोड़ा जिला रखा गया था।

1960 के दशक में बागेश्वर जिले, पिथौरागढ़ जिले और चंपावत जिले का गठन नहीं हुआ था और वे अल्मोड़ा जिले का हिस्सा थे। पिथौरागढ़ जिले को 24 फरवरी 1960 को अल्मोड़ा और 15 सितंबर 1997 को बागेश्वर जिले से बाहर किया गया था।

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