केदारनाथ, यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी

केदारनाथ, यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी

भगवान श्री केदारनाथ जी का दर्शन हर तीर्थयात्री के लिए अत्यंत आनंद का पल होता हैं, प्रति वर्ष मंदिर के कपाट खुलने पर लाखों, की संख्या में श्रदालु भगवान शिव के केदार स्वरुप दर्शन करने यहाँ आते हैं, इस विडियो में आप जानेगे – भगवान श्री केदारनाथ के मंदिर के बारे मे कई जरूरी बातें, केदारनाथ का इतिहास और मंदिर से जुडी जानकारियां
यहाँ कैसे पहुचे! साथ मे केदारनाथ के यात्रा मार्ग की जानकारी, यहाँ विसिट करने का सही समय, कहाँ रात्रि विश्राम करें, मौसम और दूसरी जरुरी जानकारिया

11700 फीट की ऊंचाई केदारनाथ धाम उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित हैं. जो श्री नर और नारायण ऋषि द्वारा प्रतिष्टित हैं। भगवान शिका का यह सुप्रसिद्ध ज्योर्त्रिलिंग देश के विख्यत बारह ज्योर्तिलिंगो में से ग्यारहवा हैं। केदारनाथ मंदिर के लिए गौरीकुंड से १८ किलोमीटर का ट्रेक हैं। देहरादून से गौरीकुंड की रोड से दूरी 250 किलोमीटर हैं, निकटतम
रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और निकतम एयरपोर्ट – जोलीग्रांट मे हैं।

कुमाऊँ मे हल्द्वानी से गौरीकुंड की दुरी सड़क मार्ग से 317 किलोमीटर, रेलवे स्टेशन काठगोदाम और एयरपोर्ट पंतनगर मे हैं।

गौरीकुंड से 35 किलोमीटर पहले, गुप्तकाशी और 20 किमी पहले फाटा से हेलीकॉप्टर सेवाए हैं, जो हवाई मार्ग से तीर्थयात्रियो को केदारनाथ मंदिर ले जाती हैं।

व्यस्त सीजन में वेटिंग से बचने के लिए / हेली सर्विस की कन्फर्म (seat) / बुकिंग के लिए एडवांस में बुकिंग करवानी होती हैं, जो ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

हम मॉनसून शूरू होने के बाद, इस तीर्थयात्रा पर निकले, jis samay हम गुप्तकाशी पहुचे, केदारनाथ की पहाड़ियों में घना कोहरा नज़र आ रहा था, कोहरे की वजह से हेलीकाप्टरस की उडान बंद थी। गुप्तकाशी से हेलीकॉप्टर का किराया लबभग 7300 (दोनों और का) एक ओर जाना हो तो इसका आधा, वही फाटा से किराया कुछ 6700 रूपये हैं प्रति यात्री। अलग – अलग हेली ऑपरेटर्स के किराये में डिफरेंस हो सकता हैं, यहाँ ५-7 ओपेरटॉरस अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

पैदल यात्रा के लिए सड़क मार्ग से गौरी कुंड आना होता हैं, गौरीकुंड – गुप्तकाशी से 35 किलोमीटर हैं, गौरी कुंड में ज्यादा गाड़ियाँ पार्क नहीं हो सकती और जाने के लिए सड़क भी संकरी हैं गौरीकुंड से 5 किलोमीटर पहले




सोनप्रयाग में फोर व्हीलर्स की बड़ी पार्किंग हैं, गाड़ी पार्क कर हम शेयर्ड टैक्सी द्वारा सोन प्रयाग से गौरी कुंड पहुंचे। सोन प्रयाग में कार के लिए पार्किंग के शुल्क 120 पहले 24 घंटे के लिए और उसके बाद रू 100 अगले हर 24 घंटे के लिए हैं. सोनप्रयाग में काफी दुकाने, होटल्स, रेस्टोरेंट्स हैं, सोन प्रयाग केदारनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों का निःशुल्क बायो मेट्रिक रजिस्ट्रेशन किया जाता हैं।

सोनप्रयाग की मार्किट से कुछ 500 मीटर्स बाद एक पुल को क्रॉस कर taxi तक पंहुचा जा जा सकता हैं यहाँ से गौरी कुंड के लिए नियमित अन्तराल में टैक्सीज चलती हैं, 4-5 किलोमीटर की दुरी का किराया रू 20 प्रति सवारी हैं.

सोन प्रयाग मन्दाकिनी नदी के किनारे है, इस नदी का उद्गम केदारनाथ मंदिरके पास चोराबाड़ी ग्लेशियर हैं. मन्दाकिनी नदी, अलकनन्दा सहायक नहीं हैं, जो रुद्रपयाग में अलकनंदा नदी में जाती हैं।

सोनप्रयाग से गौरी कुंड रोड कुछ इस तरह से हैं, हलके वाहनों के लिए रास्ते में कही कही छोटे पार्किंग स्पेस हैं. अपने वाहन गौरीकुंड तक ले जाना हो तो इसके लिए स्थानीय प्रसाशन से अनुमति लेनी होती हैं, हालांकि पार्किंग के आभाव में व्यस्त व्यस्त सीजन वाहन वापस लाना पड़ सकता हैं।

हमने गौरी कुंड से पैदल यात्रा दोपहर के करीब १२ बजे शुरू की, श्री केदारनाथ धाम के लिए – हम शाम की पूजा और सुबह की आरती में शामिल होना चाहते थे, गौरीकुंड से श्री केदारनाथ जी के लिए ट्रैकिंग शुरू हो जाता हैं , आगे बढ़ते हुए यहाँ नज़र आता हैं, एक पोस्टऑफिस, इससे आगे सीढ़ियां चढ़ मिलती हैं एक छोटी सी मार्किट, जहाँ कुछ रेस्टोरेंट, दुकाने, होटल बने हैं. और यही घोड़े का पड़ाव भी हैं, जहाँ से तीर्थयात्री केदारनाथ जी घोड़े/ खच्चर को यात्रा मार्ग लिए hire करते।

घोड़े/ खच्चर/ पालकी के अलग अलग जगह शुल्क आप स्क्रीन पर देख सकते हैं।

रास्ते में सभी उम्र के लोग पैदल चलते/ घोड़े/ पालकी/ कंडी/ डोली आदि दिखाई देते हैं, जगह जगह तीर्थयात्रियों में बाबा केदार जयघोष – पैदल यात्रा में उत्साह संचार देता हैं.

शुरुआत में रास्ते हल्की चढाई लिए हैं, रास्तो में चपटे पथ्थर बिछे, गौरीकुंड के बाद रास्ते में एक हेलिपैड चिरबासा में है जो प्राकर्तिक आपदा के बाद इमर्जेन्सी लैंडिंग के लिए बना था, इसके अलावा केदारनाथ जी के ट्रैकिंग रूट में भीमबलि और लिंचोली और केदारनाथ मंदिर के पास अन्य हेलिपैड हैं.

केदारनाथ तक की दुरी करीब १६ किलोमीटर, जिसको करने में पैदल चलते हुए अगर पैदल चलने का अभ्यास हो, तो सामान्यतः 6-8 घंटे का औसत समय लगता हैं।

गौरीकुंड से चढाई की और जाते पैदल मार्गे में कई दुकाने, रेस्टोरेंटस और होटल्स हैं, कई यात्री गौरीकुंड से सुबह केदारनाथ जी के लिए अपनी यात्रा शुरू कर, दिन में दर्शन कर शाम को वापस गौरी कुंड पहुँच जाते हैं। गौरी कुंड से आगे बढ़ते रास्ते के दोनों और के सुन्दर प्राकर्तिक दृश्य सामने आने लगते है।

देखिये यात्रा वृतांत को अपने स्क्रीन मे इस विडियो मे।