जनाब, जब भी जीवन के सफर में मुड़कर देखा तो सरकारी मकानों में रहने का सुख हमेशा याद आता है। कठघरिया में बसने के बाद जब भी प्लंबर, कारपेंटर की खोज में श्रीमती जी द्वारा दोड़ाया जाता हूँ या उनका इंतजार कर रहा होता हूँ तो वो सुनहरे दिन याद आते हैं जब हम भी […]
Author: Rajesh Budhalakoti
धरौदा – दशकों पहले के अल्मोड़ा के घर की यादें!
चंपा नौला का तीन मंजिला मकान मेरी दिल्ली वाली बुआ के ससुराल वालों का था, और हम लोग उस मकान के पांच कमरों में साठ रुपये महीने के किराएदार थे। बीच वाली मंजिल में देबी बुआ रहती थीं, सबसे ऊपर सागुडी जी मास्टर साहब और बगल में ख्याली राम पांडे जी का परिवार रहता था। […]
अखबार से नेटफ्लिक्स तक, एक आम आदमी की जिंदगी
एक तो गर्मी का मौसम और जीवन का चौथा प्रहर। जनाब काटे नहीं कटे ये रतियाँ, बीते नहीं बीते ये दिन। उम्र का तकाजा रात देर से आँख लगना और सुबह सवेरे ही खुल जाना, यानि वैसे ही ये चौबीस घंटे कैसे कटे कैसे कटे कर कटते हैं उस पर देर से सोना जल्दी उठना […]
बिनसर की वो रात!
जनाब, न तो आजकल के समान सुविधाएं थीं और न ही उस समय की सुविधाओं का उपभोग करने की सामर्थ्य। पॉकेट मनी बस नाम मात्र को मिलती थी, वरना जेब खर्च तो बाजार से लाए जाने वाले सामान में हेराफेरी से ही चलता था। पुस्तकों ने भी जेब खर्च की कमी को पूरा करने और […]
हमारा अल्मोड़ा…
सोचते सोचते दिन निकला, फिर महीने, फिर साल… लेकिन हमारे अल्मोड़ा का वही पुराना हाल… प्रकृति ने दी अद्भुत छटाएं, सुंदर हवाए, काली घटाएं, प्राचीन मंदिर, ऊँचे भवन, सुंदर अट्टालिकाए। होली की धूम, खडी होली की थाप, दशहरे का उत्सव। भव्य पुतलो की छाप, रामलीला का मंचन, दिवाली की धूम, गिरजे की घंटियाँ, मस्जिदों की […]
सरकारी आवास से अपना आशियाना
जनाब उम्र के इस पड़ाव पर जब भी मुड़ कर देखा एक बात बहुत याद आती है, यहाँ हल्द्वानी में कठघरिया मे बसने के बाद जब भी प्लमबर, कारपेन्टर, की खोज मे दोडाया जाता हूँ या उनका इंतजार कर रहा होता हूँ तो वो सुनहरे दिन याद आते हैं, जब हम भी राजाओ की तरह […]
बचपन वाली गर्मियों की छुट्टियां
बचपन की यादों मे नैनीताल के साउथ वूड कोटेज की हल्की हल्की यादे अब तक साथ निभा रही है, बाबुजी अल्मोडा मे कार्यरत थे और हम दोनो भाई एडम्स स्कूल मे पढ़ते थे, गर्मियों का अवकाश विशेष होता क्योकिं मुझे नैनीताल आमा बब्बा के पास जाने का मौका मिल्ता। बाबुजी अल्मोडा से केमू की बस […]
अल्मोड़ा – चम्पानौला की यादों से भाग 2
चम्पा नौला में हमारे मकान की लोकेशन बहुत बढ़िया थी, भैरव मन्दिर के बगल से करीब सौ सीढ़ी उतर, नौले के बगल मे, ऊपर मिट्ठू दा का मकान और हमारा घर, नौले के बगल मे होने के कारण हम लोगो ने कभी पानी की तंगी नही झेली, गर्मियों में तो चम्पा नौला मे जैसे कौतिक […]
चम्पानौला की प्रसिद्ध कैजा
आज सुबह से मुझे अल्मोड़ा वाले घर की बहुत याद आ रही है और साथ ही याद आ रही है हमारे बगल वाली कैजा, यादो पर किसीका बस तो नहीं, न कोई रोकटोक है इनकी आवाजाही पर, इसलिए मेने अपने को पूरी तरह यादो के हवाले कर दिया और सोचने लगा अपनी प्यारी कैजा के […]
नंदा देवी कौतिक से नंदा देवी मेले तक
शाम को 4 बजे माँ का डोला उठता और नंदा देवी के जयकारो से सारा अल्मोड़ा गुंजाय मान हो जाता, डोले के दर्शन कर एक हाथ में बाजा एक में गुब्बारा लेकर पो पो बाजा बजाते और आँखों पर लाल पीला पन्नी वाला चश्मा लगाए घर वापसी होती और इंतजार पुनः प्रारंभ हो जाता अगले […]
